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खुदगर्ज………..!!!

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Crowned Poem, Hindi Poetry

आया पैसा हाथ में, इज्जत और उसूल गया….!
बोम्बे लंदन याद रहा, गाँव का रस्ता भूल गया….!!

जाने कितनी रात तेरी माँ भूखे पेट ही सोयी थी…,
खुद कि कोई परवाह ना थी तेरे सपनों में खोयी थी….!
और आज पढने लिखने का बस खुद पर ही नाज है…,
जो माँ लाद कर लाती थी वो स्कूल का बस्ता भूल गया…!
बोम्बे लंदन याद रहा……………………………

जाने कैसे तेरे बाप ने पाई पाई जोड के…,
तुझे पैरों पे खडा किया था अपनी कमर को तोड के….!
और आज अमीरी के नशे में इस कदर डूबा है तू…
कि कर्ज में डूबे बाप की हालत खस्ता भूल गया….!
बोम्बे लंदन याद रहा……………………………

पर जान ले कि कल को तू सबसे धोखा खाएगा…,
जो तू अपनों का ना हुआ तो तेरा कौन हो पाएगा….!
माँ बाप क्या होते हैं तब तेरी समझ में आएगा…,
कल याद करेगा सब रोते रोते जो आज तू हँसता हँसता भूल गया….!
बोम्बे लंदन याद रहा……………………………!!

5 Comments

  1. क्या बात है …गजब
    कल याद करेगा सब रोते रोते जो आज तू हँसता हँसता भूल गया….!

  2. Vishvnand says:

    बहुत अच्छी अर्थपूर्ण कविता, मनभावन
    “जो तू अपनों का ना हुआ तो तेरा कौन हो पाएगा….!”
    संदर्भ में बहुत सुन्दर पंक्ति
    बधाई

  3. sushil sarna says:

    बडी मनभावन और दिल को छूने वाली रचना-प्रयास सार्थक है-लिखते रहिये-सुंदर रचना के लिए बधाई

  4. parminder says:

    बहुत सुन्दर रचना है| कड़वी सच्चाई सुन्दर शब्दों में सामने रक्खी है| हम तो हमेशा यही प्रार्थना करते हैं कि ईश्वर सबको सत्बुध्धी दे|

  5. dr.paliwal says:

    बहुत सुन्दर रचना है….
    हर पंक्ति अपने आप में लाजवाब है…..
    कड़वे सच का सुन्दरता से वर्णन किया है…..

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