जन्नत ऐ नूर का, दीदार हुआ अभी अभी…
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जन्नत ऐ नूर का, दीदार हुआ अभी अभी
छाया है सुरूर उनका, ऐतबार हुआ अभी अभी
चेहरे से उनके अब, नजरे न हटा सकू
लगता है हमको भी, प्यार हुआ अभी अभी
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To be Continue…
6 Comments
आपने तो बहुत खूबी से ये सब लिख डाला, शुक्रिया और बधाई,
वरना हमको भी हुआ है ये महसूस कई बार पर कभी कभी
THE LAST HINDU Reply:
July 4th, 2009 at 10:59 am
@Vishvnand, Thanks Sir Ji …
आपको अच्छी लगी यह रचना अभी अभी
दिल को सुकून मिला मेरे यह तभी तभी
हुआ agr jnnete noor का deedar abhee-abhee
तो है dua n हो rukhsat aapkee nzron से unka deedar aapse kbhee
any how, very nice

हंसती है किस्मत मेरी, कहकर मुझे जोकर यहाँ ..
जीता हू मर-मर के मै, खाकर रोज ठोकर यहाँ ..
देकर भी सुबकुछ अपना, मै कुछ नहीं पाता हू ..
कुछ भी हो नाम मेरा, मै जोकर ही कहलाता हू ..
Lovely line..
Please edit (chehre….)
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THE LAST HINDU Reply:
July 4th, 2009 at 10:41 am
@Ravi Rajbhar, Thanks Ravi Ji for your kind sugestion
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