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***नई पसंद का जमाना… ***

राम राम भाई
आज दुकान खोलने में
बड़ी देर लगाई
हमने भी पड़ोस वाले को
राम राम से अभिवादन किया
किया और अपनी
खराब तबीयत की बात बताई
फिर अपनी दुकान का
शटर उठाया
धूप अगरबत्ति जलाकर
उसके धुऐं को दुकान और गल्ले
में घुमाया और
प्रभु के आगे
अच्छी बोहनी के लिए
प्रार्थना करके धूप दानी  
शीश नवा कर
उसके आगे रखी ही थी कि
इक ग्राहक ने
अपनी उपस्थिति  दर्ज कराई
हमने चौंक कर
अपनी सुराहीदार गर्दन
भगवान बने 
ग्राहक की तरफ घुमाई
एक अधेड़ लेकिन स्वस्थ
व्यक्ति ने पूछा
क्यों जी,
क्या आप गीत बेचते हैं
हमने गर्दन को सीधा किया,
कालर पर
अपनी पतली उंगलियाँ घुमाई
और
शिष्टाचार के गिलास में
मुस्कुराहट का शरबत
पेश कर कहा
जी हाँ, सौ  प्रतिशत
नये पुराने,
हर मौसम के सुहाने
गीत बेचता हूँ
कहिये कौन सा पेश करुँ
अच्छा, ग्राहक ने कहा
वो जो ऊपर ही ऊपर
लाल कपड़े में लिपटा है
कौन से गीत का पुलिंदा है
अरे अरे आपकी तो बड़ी पारखी
नजर है
ये वो गीत हैं
जिनकी मांग
सिर्फ
राष्ट्रीय दिवसों में ही होती है
इनमें
आजादी के शहीद
सुभाष,भगत सिंह,गांधी,नेहरू,सरदार पटेल
जैसे अनेक
शहीदों की कुर्बानियां
नये युग को देश भक्ति
का संदेश दे रही हैं
न न, ये नहीं
ग्राहक ने कहा
तो फिर ये देखिये
ये रोमांटिक गीत हैं
और ये घर से
आने के गीत हैं
ये दुकान से
जाने के गीत हैं
ये प्रेमिका से रूठने के
और ये प्रेमिका को मनाने के
गीत हैं
रुकिए रुकिए
इन गीतों के पुलिंदों को
जरा धीरे से हाथ लगाना
ये औलाद के लिए तड़पती
किसी माँ के आंसुओं में
भीगे  गीत हैं
उस ग्राहक ने
वो गीत ले कर अपने
सीने से लगा लिए
और चश्मे के भीतर
बहते आँसू छुपा लिए
हम भी थोड़े से संजीदा हो गये
खैर छोडिये
हमने अपनी
दुकानदारी फिर चलाई
ये
आज के जमाने की गीत हैं
देखने में क्या हर्ज है
राज की बात है सर
इस से कम कपड़ों के
गीत आपको
कहीं नहीं मिलेंगे
और मजे की बात सर
सबसे ज्यादा बिक्री
इन्हीं की होती है
कहिये तो एक पीस ये भी रख दूं
अरे नहीं नहीं
बाल बच्चे दर आदमी हूँ
ऐसे गीतों से
अपने बच्चों के सन्सकारों की
बलि
मैं नये जमाने पर नहीं चडाऊँगा
ठीक है साहब
जैसी आपकी मर्जी
बुरा न माने हमें तो
पेट की खातिर
सब कुछ रखना पड़ता है

अब देखिये
इन भजनों के गीतों के
पुलिंदों को झाड़ने का भी
समय नहीं मिलता
क्योंकि कोई इसे
ख़रीदता ही नहीं
फर्ज,ईमान,देशभक्ति
के गीत किसी कोने में
अपनी बेबसी पर
रोते हैं
झूठी क़समों और वादों के
गीतों की आज तूती बोलती है
आज रेप गीतों का
भविष्य उज्ज्वल है
हमारी दो वक्त की रोटी
ऐसे ही गीतों की बदौलत  है
सच मानिये सर
जमाने के साथ चलने में ही
आपकी भलाई है
वरना इस अंधी दौड़ में
आपके संस्कार,उपदेश, सब
दौड़ते कदमो के नीचे
कुचले जायेंगे
किसी पुराने कागज के
टुकडों की तरह हवा में
बिखर जायेंगे
हमारी फटी कमीज
और टूटी चपल इसी
शराफत का आईना है
ये आपकी पसंद नहीं
नई पसंद का जमाना है,नई पसंद का जमाना है….

सुशील सरना

14 Comments

बहोत खूब सुशीलजी, कमाल की रचना है.

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sushil sarna Reply:

@swapnil,
शुक्रिया स्वप्निल जी, रचना आपको पसंद आई, आपने उसे सराहा-बहुत बहुत धन्यवाद

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बहुत बढ़िया सर जी …

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sushil sarna Reply:

@THE LAST HINDU,
thanks a lot for liking the poem

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ggeton Ki dukaandaari <<aur Ek kavi ki imaandaaree,,Kya kahein Gazab Ki rachna Hai,,,,BAdalte waqt ke saath badalte sangeet Ke Behtareen tasveer Dikhaai Hai aapne,, hardik badhaai

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sushil sarna Reply:

@rakesh,
thanks for passing me the so nice comments for my poem-accepted you badhaaee-thanks

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बहुत अच्छी कविता, बेहतरीन कल्पना,
काबिले तारीफ़ सबकुछ. मजा आया और बहुत दर्द भी हुआ.
रचना के लिए बहुत बधाई

” अजब आ गया है ये ज़माना,
गीत ग़ज़ल पागल ही लिख्खें ,
चोली के सब आगे पीछे,
दिल की कोई बात न पूछे
कौन, कौन देशभक्त को जाने,
सब चाहें बॉलीवुड जाने …

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sushil sarna Reply:

@Vishvnand,
many many thanks Resp.V.Anand jee, for your nice and favourable comments-thanks once again

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Sushil Ji, A really creative thought and nicely woven plot. A true picture.Liked it.

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sushil sarna Reply:

@Raj,
Raj jee, many many thanks for passing the heart loving comments – thanks

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Bahut hi sundar, satik, dil ko chhu gai….

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sushil sarna Reply:

@dr.paliwal,
many many thanks for appreciation-thanks

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सर बेहद उम्दा है कृति..एक कवि हैं श्री भवानी प्रसाद…पूरा नाम याद नहीं आ रहा..उनकी एक कविता “जी हाँ main गीत बेचता हूँ…की याद आ गई आपकी रचना पढ़ के…

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sushil sarna Reply:

@Reetesh Sabr,
lot of thanks for your favourable comments, its good that you rembebred any one-once again thanks

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