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‘ पिता ‘

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Hindi Poetry

HAPPY FATHER’S DAY

‘ पिता ‘

फूलों का खिलना , खिलकर महकना ,
हवाओं का चलना , फिज़ाओं का रंग बदलना ,
चिड़ियों का चहकना , भंवरों का गुनगुनाना ,
सागर की लहरों का हवाओं के साथ हिलोरें खाना ,
जैसे ये सब देन है इस सृष्टि के परमपिता की ,
वैसे ही हमारी ज़िन्दगी , ज़िन्दगी का हर एक पल ,
हमारी खुशियाँ , हमारी मुस्कुराहट ,
ये सब देन है उस ‘ पिता ‘ की ,
जिसे रचा है सृष्टि के रचयिता ‘परमपिता ‘ ने !

– सोनल पंवार

6 Comments

  1. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर ख़याल, बहुत मनभावन कविता
    इस सुन्दर सूझ और पोस्टिंग के लिए हार्दिक बधाई …

  2. neeraj guru says:

    सोनल,यह भी बेहद अच्छी रचना है.

  3. rajdeep says:

    manbhavak rachna

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