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जख्म……..!!!

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Hindi Poetry

दिल पे इतना बोझ है, साँसें चुभती हैं सीने में !
तिल-तिल करके मर रहा हूँ, क्या खाक मज़ा यूँ जीने में !!

आदमी हूँ हर वक्त बेजुबान तो नहीं रह सकता,
ये बोलने की हिम्मत अब कहाँ बची है सीने में !

पूछ रहा था हँस के मुझसे मिजाज मेरा,
जाने वो कौन जिंदादिल शख्स था आइने में !

उस वक्त जाने क्यूँ बस तेरा ही ख्याल आता है,
याद आ जाती है जब कभी खुद की साल महीने में !

दर्द को पालने की यूँ कीमत चुका रहा हूँ
गम खाए जा रहा हूँ, अश्क लगा हूँ पीने में !!

8 Comments

  1. Vishvnand says:

    वाह , बहुत बढिया, नवीन जी
    आपकी इस नवीन रचना का मज़ा भी कुछ और है, मनभावन
    “उस वक्त जाने क्यूँ बस तेरा ही ख्याल आता है,
    याद आ जाती है जब कभी खुद की साल महीने में !”
    बधाई ….

  2. Ravi Rajbhar says:

    वाह …नवीन जी …
    बहुत khub लिखा है आपने ..sunder और प्यारी सी दिल से likhi गई रचना बहुत pasand आई…बधाई…हो..बधाई….

  3. priyal says:

    पूछ रहा था हँस के मुझसे मिजाज मेरा,
    जाने वो कौन जिंदादिल शख्स था आइने में !

    दर्द को पालने की यूँ कीमत चुका रहा हूँ
    गम खाए जा रहा हूँ, अश्क लगा हूँ पीने में !!

    dil ko chu gayi..

  4. vartika says:

    “पूछ रहा था हँस के मुझसे मिजाज मेरा,
    जाने वो कौन जिंदादिल शख्स था आइने में !”

    waah! bahut khoob………..

  5. dr.paliwal says:

    Bahut Khoob…
    Har pankti lajawab hai….

  6. sushil sarna says:

    पूछ रहा था हँस के मुझसे मिजाज मेरा,
    जाने वो कौन जिंदादिल शख्स था आइने में !

    बहुत ही उम्दा गजल,उम्दा भाव,दिल को छू गई नवीन जी आपकी रचना-बधाई

  7. बहुत बढ़िया नवीन जी , मजा आ गया
    दर्द को पालने की यूँ कीमत चुका रहा हूँ
    गम खाए जा रहा हूँ, अश्क लगा हूँ पीने में !!

  8. sambhrant says:

    bahut khub baat kahi hai aapne

    पूछ रहा था हँस के मुझसे मिजाज मेरा,
    जाने वो कौन जिंदादिल शख्स था आइने में !

    vaah…..

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