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प्यास

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Crowned Poem, Hindi Poetry

प्रिय,
आज तुम्हे विदा करके,
तुम्हारे सामने से –
मुस्कुराता हुआ मैं चल गया,
और उधर तुम भी मुस्कुराती हुई चली गईं,
यह दुनिया भी हमें यूँ जाते देख मुस्कुरा उठी,
फिर जिस पीड़ा से हम-दोनों गुजरे,
उससे इस दुनिया को कोई सरोकार नहीं रहा,
वह कभी भी यह नहीं जान पायेगी कि,
एक-दुसरे के साथ – एक-दुसरे के लिए हम-दोनों,
किस अनकही व्यथा में घिरे हैं-
कि उस दिन,
प्यासा ही मैं तुम्हारे द्वार से लौट आया,
तुम भी –
पानी का गिलास लिए-
अपनी प्रतिबद्धताओं से घिरी चुप खड़ी रह गईं,
प्रिय-
रात भर करवटों के बीच,
आज पीड़ा के जिस प्रारब्ध को हम-तुम जी रहे हैं,
और यह दुनिया जिस तरह से मुस्कुरा रही है,
हाँ,
उसके लिए हमने अपने आँसुओं का सौदा किया है,
सोचो प्रिय –
इस दुनिया को खुश रखने के हम-दोनों ने कितना कुछ किया है.
पर हम हमारे लिए-
प्यासे ही रह गए हैं.
     ——————
-नीरज गुरु “बादल”
                 भोपाल.

11 Comments

  1. dr.paliwal says:

    बहुत खूब नीरजजी……
    सुन्दर रचना और भाव…….
    शुरूसे आखिर तक बांधे रखती है………..

  2. Vishvnand says:

    बड़ी मनभावन रचना, अति सुन्दर
    पढ़ते वक्त लगा की जैसे एक महीन दर्द में उभरा ये एक मधुर संवेदनायुक्त कोई video ही अंतर्मन में अनुभव किया जा रहा है.
    इस post के लिए हार्दिक बधाई और धन्यवाद भी.

  3. sushil sarna says:

    नीरज जी, क्या बात है-पड़कर मजा आ गया- बडी बारीकी से दर्द की अभिव्यक्ती की है-मुस्कराहटों से लिपटी विरह की वेदना और आंसुओं के आंचल में लिपटी विरह की तडप का काव्यात्मक वर्णन हिर्दय की धडकनों को प्रेम वेदना के मधुबन में ले जाता है-ऐसी रचना के लिए मेरी और से आपको बधाई

  4. vartika says:

    बहुत सुंदर…………..

  5. Vikash says:

    आप जब भी लिखते हैं – सब कुछ जाना पहचाना लगता है. 🙂

  6. shakeel says:

    ऐसा लगा कोई कहानी कोई सुना गया

  7. Preeti Datar says:

    Neeraj ji,

    The wait is worth it!
    Loved it

    Preeti

  8. Mudit says:

    अति सुन्दर नीरज जी

  9. BALKISHAN JOSHI says:

    WHAT A POETRY
    DO ALWAYS WRITE SUCH TYPES OF POETRY

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