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जूते ने कहा चप्पल से…

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Crowned Poem, Hindi Poetry

जूते ने कहा चप्पल से…
मैं ढंकता हूँ पुरे पैरों को, तू ढंकती है आधा,
फ़िर भी लोग मुझे पसंद कम, तुझे करते है जादा,
चप्पल शरमाई, मन ही मन मुस्काई,
और बोली, देखो दादा, ……
दाम है मेरे तुमसे कम, तुम्हारे है जादा,
पैरों में जाने में वक्त, मुझे लगता है तुमसे आधा,
फ़िर क्यों न लोग, मुझे पसंद करेंगे तुमसे जादा,
जूता बोला, देखो बहना, हद में रहना…….
सुरक्षा देता हूँ पुरे पैरोंको,रहे न कहींसे खुल्ला,
तुम लटकती हो पैरोमे, जैसे कोई झुला,
मैं देता हूँ, काटें, कंकड़ से बचाव का वादा,
फ़िर भी लोग मुझे पसंद कम, तुझे करते है जादा,
चप्पल बोली, देखो दादा, बोलो न जादा……..
मै पैरों को हवा देती हूँ, जैसे कमरे में खिड़की या दरवाजा,
लोगों की पसंद वैसे भी, लड़की ही जादा,
तेरे दीवाने ऊँचे लोग, मेरा दीवाना वर्ग है सीधा सादा,
भारत में सादे लोग रहते है, आधे से जादा,
फ़िर क्यों न लोग, मुझे पसंद करेंगे तुमसे जादा?
जूता डोला, हंसकर बोला……….
मैंने नेताओं की हालत की है बुरी,क्या यह नहीं मेरी बहादुरी?
झूमकर मैं किसीपर जा गिरा, दो नेताओं की चुनाव टिकिटपर चक्र फिरा,
इतनाही नहीं, पहनते थे मुझको, रावण और कंस जैसे महाराजा,
फ़िर भी लोग मुझे पसंद कम, तुझे करते है जादा,
चप्पल बोली, मन ही मन डोली………..
मुझसे बढ़ता सम्मान “हार” का, मिलता किसीको जब “प्रसाद” मारका,
दंड देती हूँ उद्दंड को,बन कर के मै शस्त्र “प्रहार” का,
पहनते थे मुझेभी, देश के आदर्श “कृष्ण और राधा”,
फ़िर क्यों न लोग, मुझे पसंद करेंगे तुमसे जादा?

18 Comments

  1. Nishant khare says:

    मुझसे बढ़ता सम्मान “हार” का, मिलता किसीको जब “प्रसाद” मारका,
    दंड देती हूँ उद्दंड को,बन कर के मै शस्त्र “प्रहार” का,
    beautiful lins…..so as poem….

  2. medhini says:

    Sweet and beautiful. Liked the rare subject,
    you have chosen for the poem.

  3. बहुत बढ़िया सर जी , इन विषयो पर लिखना अत्यधिक कठिन है..पर काफी अच्छी रचना लिखी है आपने …

  4. Preeti Datar says:

    योगेश जी,
    मुझे इस कविता तक इसका शीर्षक खींच लाया…..बहुत ही आकर्षित शीर्षक और बेहद्द बखूबी से लिखी गयी कविता….ऐसा लगता है मानो यह दोनों मेरे नजरूं के सामने बतिया रहे हो!
    प्रीती

    • dr.paliwal says:

      बहुत बहुत धन्यवाद प्रीतिजी………..
      यह विषय चुनने से पहले कुछ संकोच सा था मनमे, परन्तु आपकी प्रतिक्रिया से संकोच दूर हो गया…..
      पुन: धन्यवाद………
      YDP

  5. vijesh bhute says:

    great poem.. loved to read it.. nice work

  6. Vishvnand says:

    डॉक्टर साहब,
    ये है कमाल की कविता, बड़ी मनभावन
    बहुत बधाई …..!
    जूते और चप्पल का ऐसा सुसंवाद,
    मजा दे गया और हरदम रहेगा याद.
    जबजब हम पहनने जायेंगे,
    जूता या चप्पल, आज के बाद….. 🙂

    • dr.paliwal says:

      धन्यवाद सरजी…..
      आपकी चार पंक्तिया, मुझे प्रसन्न कर गई,
      जूते चप्पल की इस रचना को, और बड़ा कर गई…….

  7. Raj says:

    बहुत खूब योगेश जी. सच में एक अलग विषय और उसके पात्र. आपकी कलम ने अपने जादू से उनके संवादों को खूब चुना है.

  8. shakeel says:

    बहुत खुबसूरत अंदाज़ से लिखा बड़े करीने से सजाया हुआ हर हर्फ़ बड़ा मज़ा आया पालीवाल साहब.

  9. vartika says:

    Wow! कविता की विषयवस्तु और रूपरेखा दोनों ही बहुत innovative हैं sir… nd d way u have developed the plot, nd have included everythign frm d specialties of both, their usage in olden times as well as today… आपकी सोच की व्यापकता के लिए आपको प्रणाम….

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