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क्या बताऊ तुम्हे

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Crowned Poem, Hindi Poetry

अब क्या बताऊ तुम्हे
बताने को कुछ रहा ही नहीं
मेरी खामोशी समझ पाओ
तो वो ही सही|

वक़्त और रिश्तो की जंग में
शब्द लड़खड़ा रहे हैं
और मैं,
मैं बेहतर जानकर भी
उन्हें ही दोष देती हू –

ऐसा करने पर सुकूं जो मिलता है
खोटा ही सही|

इस सन्नाटे में
सांस लेना भी कठिन है
’तुम्हारे फेफडों से भी यही हवा गुज़रती है’
यह ख्याल मात्र
कुछ परिचित से आभास को खींच लता है

उन बिछडे लम्हों से
उन बिखरे रंगों से
उन गुजरी बातों से
उन टूटे वादों से……..

और
उस काल से
जहाँ ना कहने में भी
भरपूर अर्थ था|

पर अब क्या बताऊ तुम्हे
जब अर्थ ही अलग हो गए है…..

I thank Vartika, for being kind enough to help me edit this one 🙂

34 Comments

  1. priyal says:

    पर अब क्या बताऊ तुम्हे
    जब अर्थ ही अलग हो गए है…

    so true..

  2. sushil sarna says:

    और
    उस काल से
    जहाँ ना कहने में भी
    भरपूर अर्थ था|
    पर अब क्या बताऊ तुम्हे
    जब अर्थ ही अलग हो गए है…..

    प्रीति जी , हृदये की भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति को आपने बडी कोमलता से चित्रित किया है, ऐसा लगता जैसे कोई हाथ घने कोहरे में विलुप्त हुए अपने किसी को छूने का प्रयास कर रहे हों, जैसे कोई ओस की मासूम बूँद स्वयम को समर्पित करने के लिए गुलाब की पंखुरी को ढूंढ रही हो, जैसे हवाओं में लहराता आंचल किसी के हाथ में लिपटने के लिए बेचैन हो रहा हो-बहुत ही सुंदर रचना-लाजवाब अभिव्यक्ती – बधाई

    • Preeti Datar says:

      सुशील जी,

      आपके कमेन्ट करने के अंदाज़ ने मेरा दिल जीत लिया. अपने वक़्त निकलकर मेरी कविता पढ़ी और कमेन्ट करने लायक समझे इसके लिए शुक्रिया 🙂

      प्रीती

  3. medhini says:

    Sunder rachna. Pasand ho gayi.

  4. krishna says:

    अब क्या बताऊ तुम्हे
    बताने को कुछ रहा ही नहीं
    मेरी खामोशी समझ पाओ
    तो वो ही सही|
    वक़्त और रिश्तो की जंग में
    शब्द लड़खड़ा रहे हैं
    और मैं,
    मैं बेहतर जानकर भी
    उन्हें ही दोष देती हू –
    ऐसा करने पर सुकूं जो मिलता है
    खोटा ही सही|

    Loved it…

  5. Hemant mandge says:

    nice one…

  6. dr.paliwal says:

    Beautiful………….
    Sundar rachna aur bhav……

  7. Tushar.Mandge says:

    सरल शब्दों मे बहुत सुंदर रचना है …..

  8. Raj says:

    लाजवाब अभिव्यक्ति और विचार. कुछ और कहते नहीं बनता, बस ये कहूँगा कि इतनी गहराई तक जाने के लिए उस दौर से गुजरना जरूरी है.

    • Preeti Datar says:

      अब क्या बताऊ आपको….शायद सबसे सुन्दर कविता वही होती है जो कुछ अनुधाव करने के बाद लिखी गयी हो 🙂

      थैंक्स फॉर कोम्मेंतिंग.

  9. vartika says:

    hey preeti… thanks 4 d trust u bestowed in me for asking me to edit it…. nd truly the poem is a masterpiece… i just loved evry bit of it…. seems u have poured all ur heart into it… मन और मस्तिष्क का द्वंद शायद ऐसा ही होता है…. we have a thousand things dat just overflow our heart with emotions, nd d mind tries to reason them all ….इतनी सारी भावनाओं का आपस में तालमेल बिठाना और उन्हें शब्द दे कविता में बाँध पाना बहुत मुश्किल होता है, nd u have done it so wonderfully….

    hats off to u, nd nvr evr say dat u can’t write in hindi…. 🙂

    • Preeti Datar says:

      वर्त्स!! मेरे कविता से सुन्दर तो मुझे तुम्हारे कमेन्ट करने का अंदाज़ लगा 🙂 कमेन्ट पढ़कर दिल खुश हो गया…..

      एक और बात….मैं आपके पोएटिक इन्स्तिन्क्ट्स को ट्रस्ट करती हूँ इस लिए एडिटिंग में हेल्प मांगी 🙂

      शायद मैंने हिंदी में ज्यादा ओफ्तें लिखना चाहिए…..थैंक्स फॉर मोतिवातिंग में तो कामे तो थिस डिसीजन!

  10. renu rakheja says:

    I always said your hindi ones are more natural and flowing …..Good one!

  11. Aye….kya baat hai! Never seen you think this way by the way. nayeess!
    (+) – Use of Words, clean concoction of rhyme and free verse (p.s-Vikash-influence here kya?)
    (-) – None in Particular

    p-s- English english english english english english english

  12. Vishvnand says:

    A superb poem. Beautiful intense thoughts
    Liked it immensely.
    अब क्या बताऊ तुम्हे, You are truly & uniquely proficient, whether it is English or Hindi

  13. Mudit says:

    Nice…

  14. P4PoetryP4Praveen says:

    प्रीती जी…भावों को काफ़ी सुन्दरता से बुन लेती हैं आप…उससे भी ज़्यादा उन्हें अभिव्यक्त और भी सुन्दर तरीके से करती हैं…आपकी रचना दिल को छू गयी…क्या कहूँ…अब क्या बताऊँ तुम्हें…बताने को कुछ comment रहा ही नहीं…मेरी ख़ामोशी समझ पाओ…तो वो ही सही…धन्यवाद्… 🙂

  15. P4PoetryP4Praveen says:

    Aur haan…meri taraf se aapko…5*****

  16. sambhrant says:

    really a touching poem

  17. Shyam S Yadav कवि "कठोर" says:

    kuch tha …..in panktiyo mein …..mein rok nahi paya ….khud ka ….inka hone se…….!!!

    Keep on writing !!!

  18. Reetesh Sabr says:

    व्यथा वर्णन असहाय भाव समय भर न पाता कुछ घाव है उसे ही इनसे शायद लगाव…
    अच्छा संजोया प्रीति तुमने!

  19. aditya says:

    अब क्या बताऊ तुम्हे
    बताने को कुछ रहा ही नहीं
    मेरी खामोशी समझ पाओ
    तो वो ही सही………….

    वाह !!

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