« »

मौत से डर

1 vote, average: 5.00 out of 51 vote, average: 5.00 out of 51 vote, average: 5.00 out of 51 vote, average: 5.00 out of 51 vote, average: 5.00 out of 5
Loading...
Uncategorized

स्वर्ग में  सुकून  प्राप्त   होता है,
फिर हम मौत से क्यूँ डरते है?
शायद हम अपने कर्मो के बोझ को
डर के नमो तले छुपाते है?

7 Comments

  1. dr.paliwal says:

    बहुत खूब…..
    मौत के डर पर एक किताब लिखी जा सकती है
    पर आपने चार आसान सी पंक्तियों में उसे बड़ी खूबी से बांध दिया…….

  2. Vishvnand says:

    बहुत सुन्दर.
    वो मौत से डरता है, नरक में जाना है, जानता है,
    क्यूँ की कर्मो का फल वहां जरूर मिलता है,
    जितना बुरा यहाँ बोया, उसकी पूरी फसल वहां खाना पङता है.

  3. Reetesh Sabr says:

    “भला कीजे भला होगा, बुरा कीजे बुरा होगा
    बही लिख-लिख के क्या होगा…यहीं सब कुछ चुकाना है…

    सही इंगित किया है तुमने भी मेहेज़ चार पंक्तियों में!

  4. parminder says:

    Your four liner has opened up the deep seated fear of mankind. We all know we are going to meet this fate one day, still are scared. What is inevitable should be accepted by us, but इस मन का क्या करे इंसान? और-और चाहिए |

  5. Parespeare says:

    its all in the mind – the fear i.e,
    nice

  6. vartika says:

    bahut sochne lag gayi ho aajkal tum…itnaa sochnaa accha nahin…. 🙂

  7. Preeti Datar says:

    aap sabke comments ke liye dhanyavaad!

Leave a Reply