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मंजिल मेरी ….!

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Hindi Poetry

मंजिल  मेरी ….!

मंजिलें  तो  हैं  बहुत,
पर  रास्ते  अच्छे  नहीं,
और  जो  रास्ते  बने  हैं,
वो  मेरी  मंजिल  नहीं.
ऐसी  उलझन  में  पडा  था,
सोचता  था  क्या  करुँ ,
रास्ते  जो  हैं  गलत,
उन  रास्तों  पर  क्यूँ  चलूं ….!

ऐसे  भ्रम  में  जी  रहा  था,
मंजिलों  से  दूर  था.
पर  कभी  सुलझेगी  उलझन,
ये  मेरा  विश्वास  था…..!

एक  दिन  जीवन  में  मेरे,
दिल  की  खिड़की  खुल  गयी,
” रास्ता  तुम  खुद  बनाओ ”
दिल  ने  हँस  आवाज़  दी….!
ये पते की बात अद्भुत
मान  मैंने  ठान  ली ….!

मंजिले  ना  अब  सताएं,
और  सब  पास  आ  गयीं,
“रास्ता  खुद  का  बनाना”,
बन  गयी  मंजिल  मेरी …..!

“ विश्व  नन्द  ”


( The fun, happiness, achievement and self fulfillment is much more in the very enjoyment of the process of doing things in the right & holistic manner, and is irrespective of & much more than in the actual achievement of end results).

11 Comments

  1. dr.paliwal says:

    BAHUT SUNDAR SIRJI…
    एक दिन जीवन में मेरे,
    दिल की खिड़की खुल गयी,
    ” रास्ता तुम खुद बनाओ ”
    दिल ने हँस आवाज़ दी….!
    ये पते की बात अद्भुत
    मान मैंने ठान ली ….!

    “रास्ता खुद का बनाना”,
    बन गयी मंजिल मेरी …..!
    JOSH BHAR GAYA…
    BAHUT UMDA LIKHA HAI…

  2. Reetesh Sabr says:

    “रास्ता खुद का बनाना”,
    बन गयी मंजिल मेरी …..!

    aapke tajrubaat zindagi ke saar jaise hain, hum aaj ke naunihaal, bad nihaal ho jaate hain inhe chakh ke!

  3. Reetesh Sabr says:

    रास्ता खुद का बनाना”,
    बन गयी मंजिल मेरी …..!
    आपके तजरुबात ज़िन्दगी के सार जैसे हैं, हम आज के नौनिहाल, बड़े निहाल हो जाते हैं इन्हें चख के !

    • Vishvnand says:

      आपकी टिपण्णी और विचारों के लिए मेरा आदाब.

  4. Sudha says:

    I really liked these lines Vishvnand Ji…
    “रास्ता खुद का बनाना”,
    बन गयी मंजिल मेरी …..!

  5. Parespeare says:

    loved the last stanza and the poem immensely

  6. krishna says:

    It’s always a pleasure to read your work.
    poetic yet they are enthused with a lot of wisdom and truth.
    Loved this one. Very motivating and encouraging…

    • Vishvnand says:

      Thank you Krishna for your comments and appreciation of this Hindi poem.
      I also admire your poems in English which have inputs of a lot of philosophical pondering to muse.

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