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FOR MY FATHER

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Hindi Poetry

   FOR   MY  FATHER

बहती नदिया की धारा को जैसे
अपने भीतर समाया है सागर ने ,
अपनों के प्यार और सम्मान को वैसे
अपने भीतर संजोया है आपने !
आपके आदर्शों की परछाई तले
पले-बढे है हम सभी ,
इन आदर्शों को साथ लिए
जीवन जीना सिखाया है आपने !
आसमान की तरह ऊंची है
आपके व्यक्तित्व की ऊँचाई  ,
अपने सद्गुणों से इस व्यक्तित्व को
और भी गरिमामय बनाया है आपने !
कहते है ” धरती पर रूप माता-पिता का
पहचान है उस विधाता की ” ,
लेकिन इन कोरी पंक्तियों को
जीवन का यथार्थ बनाया है आपने !

                                – सोनल पंवार

7 Comments

  1. dr.paliwal says:

    Wah Sundar Atisundar….
    Maa ki mahima sabhi gate hai…
    Pita ki Shaan me aapne jis bhavukata se likha hai..
    Lajawab hai..
    badhai ho…

  2. rajdeep bhattacharya says:

    lovely poem

  3. vartika says:

    sunder panktiyaan… dil se nikali cheezein youn hi khoobsoorat hua karti hain….:)

  4. gopal says:

    Hi

    Beautiful poem .

    Thanks

  5. kalawati says:

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है,

  6. Vishvnand says:

    सोनल,
    बहुत सुन्दर, भावनाओं का सागर सी यह कविता, इस महान रिश्ते के प्रति अति सुन्दर श्रध्धांजलि है.
    मन आनंद विभोर करने वाली.
    इस रचना के लिए बहुत सारी बधाई

  7. sonal says:

    धन्यवाद !

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