« »

खोया संकुचा सा मैं……..

2 votes, average: 4.50 out of 52 votes, average: 4.50 out of 52 votes, average: 4.50 out of 52 votes, average: 4.50 out of 52 votes, average: 4.50 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

क्यूँ था खोया संकुचा सा मैं,
जब तुम आकर मिली,
पास हुई खड़ी मेरे,
मन में मची कैसी थी,
वह हलचल,
समझ न आया अब भी,
बीते कई साल पर,
करवटें बदल रहे थे अरमान,
उमंगें जाग रही थी मनमे,
बवंडर सा विचारों का,
खलबली सी खुनमें,
क्यूँ न जुटा पाया साहस,
जबकि नजरे तरसती थी,
एक झलक को तुम्हारी,
हंसी कोमल,
ओंठ पंखुड़ी गुलाब जैसे,
चाल में वह नजाकत,
घुंघरुओं का थिरकना जैसे,
आज हालात क्यूँ बदले से है,
मैं “राम” और तुम “रहीम” को मानती हो,
कब मिटेंगी यह दूरियां,
दिलों से सरहदों की,
सोचता हूँ जब भी,
हो जाता हूँ फिर,
खोया संकुचा सा मैं……..

18 Comments

  1. Mudit says:

    bahut khoob sir….

  2. vartika says:

    kavita kaa ant mujhe pasand aaya….

  3. dr.satyavirtyagi-bezardehlvee says:

    आजे एक सुन्द्र्र कविता पढने को मिली-आभार्
    मैं “राम” और तुम “रहीम” को मानती हो,
    कब मिटेंगी यह दूरियां,

    सुन्दर भाव है,बधाई

  4. rajdeep says:

    behat manbhawak sir

  5. kalawati says:

    bahut sundar

  6. shakeel says:

    ye aapka kamal hai ki choti choti lineo
    main aapne bada jadu kiya hai.
    bahut maza aaya padh kar.

  7. Bahoot Khub Sir..
    Apki etani sunder rachna bahut pasand aaye.

  8. viju says:

    very nice & easy flowing,

    takes time 4 me 2 read hindi poems, bahut accha laga 🙂

    • dr.paliwal says:

      Thanks Vijuji….
      I appreciate your patience, though it takes time 2 read in Hindi….
      You did it…
      I am happy….

  9. Vishvnand says:

    Another Very beautiful one from you with feelings most can identify with.
    “बीते कई साल पर,
    करवटें बदल रहे थे अरमान,”
    “क्यूँ न जुटा पाया साहस,
    जबकि नजरे तरसती थी,
    एक झलक को तुम्हारी,”
    Beautiful lines in the context.

    Would love to hear this one in your own voice too. Please do try and post a podcast.

    • dr.paliwal says:

      Dhanyavad Sirji….
      साहस जुटा न पाया podcast ke liye…
      Aage Jarur koshish karunga….

      Thanks…

Leave a Reply