DOOR KANHI NEEND–(HINDI GEET)
AAO KHAT LIKH DE
THAM GAI HAVAAON KO
ROKE KUCH DER OR
SHYAM SEE GHATAOIN KO
DOOR KAHI NEEND-URDI JAYE RE.
MAN KE HAI PANKH
PAR BAHUT CHOTE
AAKAASHI SVPNO KE SAAMNE
KAD KITNA BOINA HAI
TAN KE MRIGCHONE KAA
PALKO KA BOJH CHALE NAAPNE
AAO CHAT OARD LE HAM
BHAGTE SAMAYA KEE
DOOR KANHI NEED UARDI JAAYE RE.
SAVPNO KE DHER SUCH KANHAA HONGE
BHOOL CHALE SHAK
SAMVAT ITIHAAS KO
PERO KE NEECHE JAMEEN KANHAA
DORD PADE CHOONE ISS
ISS UCHE AAKASH KO
TANTE RAHE CHADAR
UNSILE KAMEEJ KEE
DOOR KANHI NEED UDHI JAYE RE–..
POSTED BY KAMLESHKUMARDIWAN
NOTE-; YAH MAIRE DIORAA RACHIT GAAYE JAANE BAALE GEET HAI KRIPYA AAP BHI GUNGUNAYEN
4 Comments
बहुत सुंदर गीत. देवनागरी लिपि में लिखा होता तो और सुंदर होता.
अगर आपको p4poetry की देवनागरी लिपि लिखने में असुविधा होती है तो आप ये देखिये: http://blog.p4poetry.com/2008/05/post-poems-in-indian-languages.html
आशा है कि आगे से आपकी कवितायें देवनागरी में पढ़ने को मिलेंगी.
sunder geet hai. devnagri mein aur char chand lag jayega.
hindi font ke liye see this link—-
http://www.google.com/transliterate/indic#

परिचय
नामःः कमलेश कुमार दीवान
जन्मःः २१ जुलाई १९५८
स्थानःः ग्राम मारागाँव तहसील बाबई
जिला होशंगाबाद म.प्र. भारत
निवासःः 15/38 मित्र विहार कालोनी होशंगाबाद म.प्र.
ई मेलः kamleshkumardiwan@gmail.com
ब्लागपोस्टः kamleshkumardiwan.blogspot.com
शिक्षाःःएम.ए भूगोल,.बी. एड.
प्राचार्य हाईस्कूल,म.प्र.शासन स्कूल शिक्षा विभाग
देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों मे स्वतंत्र लेखन ,
सर्वोदय प्रेस सर्विस,इंदौर म.प्र.के माध्यम से भारत के
अनेक अखबारो मे लेखो का प्रकशन।
नई दुनिया ,जनसत्ता नवभारत टाइम्स ,हिन्दुस्तान
नवभारत, दैनिक भास्कर ,आदि अनेक महत्वपूर्ण
समाचार पत्रौ मे सामयिक लेखो का प्रकाशन ।
गीत, भजन और कविताएँःः समकालीन भारतीय साहित्य नई दिल्ली
उत्तरार्ध्द मथुरा,कला कलश बम्बई,अक्षत खडवा,आकँठ पिपरिया,
समांतर शुजालपुर म.प्र. और ब्लाग आदि मे प्रकाशित ।
उत्तर भारत भूगोल पत्रिका मे शोध पत्र का प्रकाशन।
Bada sunder Geet hai….
Bahut khoob…..
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