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आज मैं शादीसुदा हूँ…….

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Hindi Poetry

“जब मैं कुंवारा था” यह कविता मेरे करीबी दोस्त की शादी के पहले की
और “अब मैं शादीसुदा हूँ” उसके शादी के बाद की कहानी को बयां करती है.

मैं अपनी शादीसुदा जिन्दगी में बहुत खुश हूँ,
क्योंकि मैंने पहले शादी की और बादमे प्यार किया……..

 

आज मैं शादीसुदा हूँ,
पास रहकर देखता, तुम्हारी हर अदा हूँ,
हर अदा पर तुम्हारी, मैं तो फ़िदा हूँ,
किस बात कमीं, खल रही है मुझको,
जीवन की हर खुशी तो, मिल रही है मुझको,
साथ हूँ तुम्हारे पर, अपनोसे जुदा हूँ,
आज मैं शादीसुदा हूँ………

जब बार बार, हिचकी मुझे आती है,
माँ की याद, जोरों से सताती है,
वो भाई का डांटकर, गले लगाना,
मेरे लिए तो बस, बन गया है अफसाना,
जिम्मेदारियों के, बोझ से मैं लदा हूँ,
आज मैं शादीसुदा हूँ………

कहते है मुहब्बतमें, बहुत कुछ खोना पड़ता है,
क्या जिस्म का दाया हाथ, बाए से लड़ता है?
तुम्हे पाने की आरजू में, सही मैंने तनहाई है,
पर अपनों से बेरुखी, किसको रास आई है,
तुम्हारे लिए कर चुका, सबको अलविदा हूँ,
आज मैं शादीसुदा हूँ……….

6 Comments

  1. VishVnand says:

    अच्छी कविता, पढ़कर मजा आ गया.

    शादी के बाद ऐसा कुछ तो अलग होता ही है. चित्त भी मेरा पट्ट भी मेरा तो होता नहीं. लेने के देने पड़ जाते हैं.

  2. seema says:

    kavita achi hai.. a little controversial.. can we blame it totally on the marital status? Hmm let me not start a controversial discussion and read it as a simple poem….

  3. parminder says:

    मान गये जी । पर controversy झलक रही है । आप सम्मोहित भी हैं व निराश भी । अरे भैइ यही तो शादी के मजे हैं ।

  4. ranu says:

    bekar ki tuk bandi kar di hai kya kahana chah rahe hai samajh nahi aa raha aaj har koi aapne aap ko lekhak and kavi samajhne laga hai.

  5. ranu says:

    आज हर कोई आपने आप को kabi समझ ने लगा है faltu की tukbandi है क्या kahana chah रहे है पता नहीं bakwash है

    • dr.paliwal says:

      @ranu,
      Ranu Ji Mujhe lagta hai meri is rachna ne aapki kisi dukhti rag par hath rakh diya hai, jisse aap aahat hui hai……..
      Main jamin se juda hua insan hun aur apni rachnaon me vahi likhta hun jo maine apne ird gird anubhav kiya hai……
      Maine is rachna me koi bahut kathin shabdon ka istemal nahi kiya hai jo samajh na aa sake……Han Is rachna me controversy jarur hai……
      Maine iske pahle “Jab Main Kunwara Tha” naam ki kavita bhi likhi thi use bhi padh lijiye shayad kuchh samajh me aa jaye……
      Aur ek baat….
      Ranu Ji aapki jankari ke liye bata dun ki main kabhi apne aap ko bada kavi ya lekhak nahi samajhta , phir bhi mujhe yah lagta hai aap yah rachna padhkar aahat hui aur itne tahas me aakar yah comment diya, matlab yah rachna jarur asarkarak hai………

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