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paryavaran (A Story)

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Crowned Poem, Hindi Poetry

“पर्यावरण पर” ( एक कहानी)
पर्यावरण सुरक्षित बंद कमरे में,
सुगन्धित मीठी मीठी सांस लेते हुए ,
बंटी चकित है…..चिंतित है……..

सुना है उसने कि पापा के पापा,
खुले आकाश में निर्विघ्न सांस लेते थे,
खेतो के बीच औ” लम्बी पगडन्डी पर,
दौड़ लगाते औ गिल्ली डंडा खेलते थे,
कम्प्यूटर पर नही …खुले आकाश में…?.
बंटी चकित है….चिंतित है……

नदियों झरनों का पानी गटागट पी जाते थे,
तालाबो के अथाह जल में नहाते थे,
इतना पानी? ठेर सारा पानी होता था,
उसमे झींगुर बिच्छु भी नही होते थे,
तब पीने का पानी मुफ्त मिलता था?
बंटी चकित है…..चिंतित है…..

पीपल, बरगद, टीक, शीशम बोनसाई रूप में,
खूब सज रहे है बंटी की खिड़की में,
विशाल छायादार औ असंख्य होते थे,
पापा कहते है, जंगलो में……
ये जंगल क्या होते है? ….कैसे होते है?
बंटी चकित है……चिंतित है…….

अनगिनत बार पापा के पापा ने ,
पहाडों पर सच्ची-मुच्ची की बर्फ के,
गोले बनाकर उछाले है, फेंके है, मारे है,
कुत्ता-गाडी में बैठ कर घंटो फिसले है,
दूध सी सफ़ेद बर्फ के समुन्दर में नहाए है,
सॉफ्टी नही…ठेर सारी सच्ची-मुच्ची की बर्फ?
बंटी चकित है…..चिंतित है……..

पर्यावरण सुरक्षित बंद कमरे में,
बंटी उदास है…..बंटी मचलता है….. और चिल्लाता है….पापा…पापा….पापा….
क्यों रौंद डाला? क्यों छीन लिया? हमारा अधिकार…
नही चाहिए हमें…नही चाहिए..मशीनी सुख….
दो पल के लिए ही सही…लौटा दो हमें…
हमारा प्यारा घरौंदा ..हमारा प्यारा आंगन….
किलकते पंछी…औ..फूलते-फलते वन-उपवन …
वन…..उपवन…..

सुधा गोयल ‘नवीन”

11 Comments

  1. VishVnand says:

    सुंदर गहन कल्पना और कथन.
    मनभावन अर्थपूर्ण कविता.
    सुखद अनुभूति.
    धन्यवाद.

  2. seema says:

    Sudhaji, As always, lovely poem… nice message…

  3. vartika says:

    hmm..i guess v all cud relate to this…. beautiful style of putting fwd things…

  4. Preeti Datar says:

    Wah! well said! Ur poems are gems :)

  5. dr.o.p.billore says:

    पर्यावरन पर चिन्तन एक महान और आवश्यक कार्य है,जोकि आपने बंटी के माध्यम से किया .साधुवाद.बंटी कि चिन्ता दूर हो सकति है यदि हम ;- ” पर्यावरन रक्शा की शपथ “ले.
    एक और प्रयास इस लिन्क पर देखे
    http://ombillore.mywebdunia.com/2009/01/27/1233079320000.html

  6. P4PoetryP4Praveen says:

    Sachmuch aapki rachna kehti hai ki, “Jago abhi bhi waqt hai”…aur kahin sachmuch kal Banti yahi sawal na puch le isliye aaj se hi paryawarn ki raksha karne ki qasam khani hogi…sachmuch aapne ek shikshak hone ka farz bakhubi nibhaya hai…

    Aapki rachna ke liye bahut-bahut badhai…saath hi January-2009 Contest ka 1st runnerup banne ke liye bhi badhai… :)

  7. medhini says:

    Sunder kavita&sunder presentation.

  8. Naveen Mani Tripathi says:

    बहुत ही सुन्दर रचना बिलकुल संग्रहनीय …..बधाई स्वीकारें.

  9. Really very well written and magically a heart touching poem.

  10. A great poem and very nicely presented.

    • sudha goel says:

      आप सभी ने जो सराहना की है, उसके लिए मैं तहे-दिल से शुक्रगुजार हूँ। आपने मेरा उत्साह बढाया, इतने दिनों बाद फिर से पढ़ा. बहुत-बहुत धन्यवाद।

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