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प्यार

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Hindi Poetry

जिस मोड़ पर तुम बिछड़ गए थे,

मैं, आज उस मोड़ पर खड़ा हूँ प्यार,

इन्तजार बस इन्तजार———-

 

कभी-कभी व्याकुल हो उठता हूँ ,

सोचता हूँ,

तुम तारा बन गगन में जड़ गए हो कहीं

बस अब ही बदली छटेगी,

तुम टिमटिमाओंगे प्यार,

मैं दिल की गहराइयो तक,

सारोबार हो जाऊंगा,

तुम्हारी रोशनी में,

 

कभी सोचता हूँ नहीं-नहीं तुम,

बादल से उड़ गए हो कहीं,

अब ही बदली आएगी,तुम

घटा बन छा जाओगे प्यार

तुम्हारी बौछारों में,

सम्पूर्णता से भीग जाऊंगा प्यार,

 

मन पागल है मानता ही नहीं

लगता हैं,

तुम फूल बन खिले हो कहीं,

फूलों की भीनी खुशबू में

तुम्हारी सिर्फ तुम्हारी महक

महसूस करता हूँ प्यार,

 

हर जगह ढुंढता हूँ तुम्हें,

दिवानों की तरह,

खोजता हूँ तुम्हें,

तरस जाता हूँ पाने को

कभी ठोकर लगती है तो पाता हूँ ,

तुम्हें पास सम्हल जाने को

इसलिए एक भक्त सा रहता हूँ

तुम्हारी भक्ति में प्यार

 

7 Comments

  1. neeraj guru says:

    बहुत ही शानदार…..बहुत ही शानदार.

  2. Harsh Kant Sharma says:

    गुरूवर धन्यवाद तारीफ के साथ सुधार की सलाह भी दें

  3. kalawati says:

    bahut khub hai sir

  4. rajdeep bhattacharya says:

    very well written
    sir
    enjoy readin ur poetry
    keep on writing
    regards
    rajdeep

  5. VishVnand says:

    बहुत सुंदर रचना.
    प्यार का परिवर्तन भक्ति में होना ही प्यार का उच्चांक है
    और यह भाव कविता ने सुन्दरता से निखारा है.

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