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“एक ऑर जिंदगी”

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Hindi Poetry

था आया पतझड का मॉसम,

मुरझा गया था तब चमन.

बेरंग था कलियों का दामन,

भूल गये थे भंवरे गुंजन.

बीत चुका वो भयानक मंजर,

लेकर बहार फिर आया वसंत,

लगाया रंगबिरंगे खुशीभरे मरहम,

छाई बहार खिल उठा मधुबन.

 

डूबते ही सुरज छा गया अंधियारा,

कुआं गमों का जॅसे ऑर गहराया.

आकाश के तारे लगे थे टूटने,

जॅसे मेरी उम्मीदें लगी थीं छूटने.

अश्कों की छांव तले गुजर गयी रात,

सुबह का उजाला लेकर आया नई शुरुवात,

हो गये गम फिर से मात.

 

दुख के बाद होती हॅ सुख की आवक,

मुरझाई कलियों में जॅसे फिर से महक,

जॅसे पतझड के बाद फिर वसंत,

रात के बाद जॅसे भोर संग आशा की किरण,

तपनभरे गम के बाद जॅसे खुशी,

मिली वॅसे ही मुझे, मॉत के बाद एक ऑर जिंदगी.

  राजश्री राजभर

9 Comments

  1. rajdeep bhattacharya says:

    सुबह का उजाला लेकर आया नई शुरुवात,

    हो गये गम फिर से मात.
    maja aa gaya
    gr8
    ****
    keep writing
    regards
    rajdeep

  2. Rakesh Verma says:

    nice poem wid a good theme !
    It reflects the stearngth of your innerself !
    Congrats !

  3. Harsh Kant Sharma says:

    इस आशावादी कविता के लिए धन्यवाद
    कविता की लय काफी अच्छी है

  4. VishVnand says:

    सुंदर कविता. सुंदर उपमाये.
    आशावादी उपवन का माहौल रचाती हैं
    बहुत खूब

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