बर्थ सर्टिफिकेट (Birth Certificate) ……!
बर्थ सर्टिफिकेट……!
दूरदर्शन पर सरकार का विज्ञापन,
बात, फिर फिर , यही ठसा रहा था,
कि हर भारतीय को,
अपने नए जन्मे शिशु का,
जन्म दाखला करवाना,
शिशु के लिए और,
देश की भलाई के लिए,
बहुत जरूरी था…..
यह जानते हुए,
एक बेचारा सुशिक्षित भारतीय बाप,
जिसके यहाँ कई वर्षों बाद,
पहला शिशु जन्मा था,
बहुत खुशी से,
भारी वर्षा में भी,
काफी तकलीफ उठाते हुए,
देश और शिशु की भलाई के लिए,
बिना देर किए
नगर पालिका के भव्य दफ्तर में पहुंचा,
और बड़े आनंद और आतुरता से,
फॉर्म भरने के लिए,
कतार में खडा रहा,
पर खिड़की वाला कर्मचारी बाबू,
काफी देर तक लापता था.
बड़ी देर बाद,
कर्मचारी बाबू सीट पर आया,
धीरे धीरे काम शुरू हुआ,
और जब इस बिचारे बाप का नंबर आया,
तो उसने, हंसते हुए, बड़ी खुशी से
कर्मचारी बाबू को, अपना समझ,
खुशी का कारण बताते हुए,
बर्थ सर्टिफिकेट फॉर्म देने का अनुरोध किया,
कर्मचारी बाबू ने, जैसे बड़ी उदारता से,
कान खुजाते हुए, पर रुक्ष स्वरों में,
उस बाप के हाथ, एक फॉर्म दे मारा,
कहा… इसे भरो , और चलता बना.
बात पूरी नही हुई, असली तो अब है…..
बेचारे बाप ने जब वह फॉर्म
भरना शुरू किया, और देखा,
तो घबरा के,
अवाक और भौचक्का सा रह गया .,
वह फॉर्म जन्म दाखिले का नहीं,
डेथ सर्टिफिकेट का था….!
फिर भी, वह, कुछ ठहर,
धीरज जमा, ढूंढता हुआ,
उस कर्मचारी के पास पहुंचा,
और उससे पूंछा,
“भाईसाब ये कैसा मजाक है आपका,
मैंने बर्थ दाखले का फॉर्म माँगा,
और आपने हमें म्रत्यू दाखले का फॉर्म थमाया ?
कर्मचारी बोला,
“भाई मजाक, वजाक, कुछ नही है,
सबको मालूम है,
जन्म दाखिले के फॉर्म ख़तम हो गए हैं,
वैसे भी फेमिली प्लेनिंग के दौर में कम ही छपते हैं,
और म्रत्यू दाखले के फॉर्म स्टॉक में बहुत बचे हैं,
इसलिए हम, दोनों के लिए यही फॉर्म देते हैं,
आप जहाँ जहाँ डेथ लिखा है,
उसे काट कर, उसकी जगह बर्थ लिखिए,
और फॉर्म भर कर जमा कीजिये,
पन्द्रह दिन बाद आइये,
अपना बर्थ सर्टिफिकेट ले जाइए.”
सीधी बात है, समझे ”
उसपर वह अब क्या बोलता ? चुप रहा……
और वह बेचारा सुशिक्षित भारतीय बाप,
अपने शिशु और देश की भलाई के लिए,
स्वतंत्र भारत में, इस तरह्,
अपने शिशु के जन्म दाखिले का फॉर्म,
भरने लगा ……!
( एक सुनी हुई सत्य घटना पर आधारित)
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your sense of humour is proved great through this sweet beautiful poem.
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