मोहब्बत
जिसको सोचा तुमने
उसने चाह किसी और को
जिस नाम को उसने पूजा
उसने सजदे किए किसी और के नाम
अक्सर यूँ ही होता है-
जंजाल बन के उलझ जाते हैं
मोहब्बत के किस्से
और दर्द आता है
हर एक के हिस्से
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जिसको सोचा तुमने
उसने चाह किसी और को
जिस नाम को उसने पूजा
उसने सजदे किए किसी और के नाम
अक्सर यूँ ही होता है-
जंजाल बन के उलझ जाते हैं
मोहब्बत के किस्से
और दर्द आता है
हर एक के हिस्से
No related poems.
Kya baat hain…
kya khayalaathain….
Pyaar har kisiko nasseb nahi hota,
kaas premi yeh pehle jaan pata…
Good one ….
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