“Dhundhali Tasveer”


आखों में थी एक धुंधली तस्वीर,

लगा जॅसे हॅ यही मेरी तकदीर.

निकलकर तस्वीर से हुआ उनसे दीदार्,

किया वादा, जीवन की नॅया लगाएंगे मिलकर पार.

पर रह गए तन्हा हम बीच मंझधार्,

देखा हमने उन्हें जाते बहुत दुर्,

न जाने क्यों लेकर आए वो प्रेम का उपहार्.

लबों पे छोड् गए कई सवाल्,

जवाब न ढुंढ पाए मेरे खयाल्.

चेहरा जो था नजरों में,

पलक झपकते खो गया अफसानों में.

खुशियों की आहट से थे बहुत खुश्,

साया भी न छु पाए हम खुशी के.

दुवा करते हॅ यही रब से,

फिर न आए कोई बनकर जिंदगी,

दे न जाए कोई गम की लडी.

यादों की तस्वीर पड जाए ऑर धुंधली,

भुलकर भी न आएं वो यादें अनकही.

जब मिलें हम उनसे कभी,

मिलें हम फिर एक बार बनकर अजनबी…

राजश्री राजभर

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Comments

बहुत खूब- लिखते रहिये

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just work on the hindi typing a bit-i know it take s a little practice but the pleasure in a perfectly rendered script elevates the poem

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