कुछ कीजिए—


कुछ कीजिए

 

बिगड़ने लगे हैं हालात

कुछ कीजिए,

हर तरफ लगी है आग,

कुछ कीजिए.

 

जहां हम पिकनिक मनाते थे कभी,

वो पहाड़ वो खेत ,

कंकरीट में बदल रहे हैं

कुछ कीजिए.

 

नदी झीलो पर भी,

बिल्डरो की ठहरी हुई है

आंख,

कुछ कीजिए,

 

कचरा रसायन मैला

नदी नालो में बहाया जाता है,

नदी नालों में, नाले मैदानों में

बदल रहे हैं कुछ कीजिए,

 

जंगल खत्म हो रहे हैं

पशु पक्षियों का हो,

रहा है शिकार,

कुछ कीजिए,

 

सोचिए यदि ऐसा ही चलता रहा,

क्या देगें हम आने वाली पीढ़ी को,

यह धारा जमानत है अगली पीढ़ी की,

कुछ कीजिए.

 

बिगड़ने लगे हैं हालात

कुछ कीजिए,

हर तरफ लगी है आग,

कुछ कीजिए.

                                                        हर्ष शर्मा

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Comments

Kaafi accha hain…
We must do something…
The solution is awareness…

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Krishna is right, the awareness is the only one solution and it must be for save the humanity.

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हम सब को ही करना है- पर वाकई में क्या हम इतना करते हैं,जितना करना चाहिये ?
बहुत अच्छा मुद्दा रखा है आपने

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