Ped aur Dosti ( Friendship Day 3rd Aug ke liye)


फ्रेंडशिप डे ३ अगस्त के लिए

पेड़ और दोस्ती


देखो तो कितना बड़ा हो गया
हमारी दोस्ती का यह पेड़
कुछ शब्दों के बीज बोए गए थे पहली बार
बरसों तक यकीन के पानी से सींचा
वक्त की धूप से चाहत का अंकुरण फूटा
हवाओं ने हर पल पाला और संभाला
हमारी संवेदनाओं की जमीन ने
जड़ों को भीतर तक फैलने का रास्ता दिया
कितनी बार आए तूफान
कितने सैलाब
सबने कोशिश की जड़ से उखाड़ने की
हमारे यकीन से खड़े दरख्त की
टहनी तक नहीं हिला पाया कोई
पेड़ को एक उम्र दी है हमने
ताकि यह पेड़ ता-उम्र
हमारी पहचान बना रहे

-प्रताप सोमवंशी

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Comments

lovely poem. keep writing.

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प्रताप जी मैंने पहली बार आप की कविता पढ़ी……आप उपमा का अद्भुत प्रयोग करने में सक्षम हैं, आप से इसी प्रकार और रचनाओं की अपेक्षा करते हैं……….इस सुंदर रचना के लिए आप को 5 star.

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बहुत ही सुन्दर रचना

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