अभिव्यक्ति (abhivyakti)
सर्द मौसम में जहाँ,
कुछ पेड़ गए मुरझा…
वही तन मन में है
नई स्फुर्ती,नई उर्जा…
मन में है एक नया गीत,
कुछ अभिव्यक्ति सृजन,प्रीत
कुछ लिखने को,कुछ कहने को,
सुनने को,चुनने को…
और भावनाओ में बहने को,
कही उभरा एक नया एहसास…
सजाए आशा और विश्वास
है सुरमई अखियों में प्यार…
लिए प्रकृति का माधुर्य अपार,
मन में जन्म लेते है-कुछ सुंदर विचार,,
नया साल..ठंडी हवाओं के झोके,
ऐसे में कैसे कोई
मन की लगाम को रोके,
दिन महीने साल गए…
आगन्तुक बना नव वर्ष,
प्रेषित किया उल्लास और हर्ष…
ये कैसा ख्यालो का चरमोत्कर्ष,
पता नही इस बार,
मिलेंगे चांद-तारे,
या यु ही रह जायेंगे…
बैसाखियों के सहारे
शायद चंद लाखीरे है,
उज्जवल नई जिज्ञासा-अभिलाषा
फिर से चलो देखे,
लड़ा के सारी शक्ति,
क्या इसी वर्ष होगी,
हमारे मन की सच्ची अभिव्यक्ति?
२४ दिसम्बर २००४.

A Beautiful poem of positive emotions,
on the advent of a New Year.
Nice posting indeed.
Compliments & Welcome to p4poetry.
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