माना कि हो सुंदर तुम….!
माना कि हो सुंदर तुम….!
माना कि हो सुंदर तुम, मगर ये दिन नहीं रहते,
गए दिन बीत बस इकबार, फिर से ये नहीं मिलते…..
करो मत नाज़ यूं ख़ुद पर, ज़रा सा सुनलो भी मेरी,
न खोना वक्त ये सुंदर, किसीसे प्यार कर लो जी,
खड़े जो हम तेरी राहों में अब, हरदम नही रहते,
गए दिन बीत बस एकबार, फिर से ये नहीं मिलते…..
फिर से ये नहीं मिलते…..
माना कि हो सुंदर तुम….!
जो ख़ुद में खो गई हो तुम, ज़रा दुनिया को भी देखो,
किसी को अपनी नजरों से, ज़रा सा प्यार तो दे दो,
तुझे अब क्या कहे कोई, लो तुम कुछ भी नही कहते….
गए दिन बीत बस एकबार, फिर से ये नहीं मिलते…..
फिर से ये नहीं मिलते…..
माना कि हो सुंदर तुम….!
जो कहता आज तुझको मैं, कभी तो याद आयेगा,
मिलेगा तुझको ना दुनिया में, मेरे जैसा दिलवाला,
बड़े अफसोस से लो अब चले हैं, दूर हम तुमसे,
गए दिन बीत बस एकबार, फिर से ये नहीं मिलते…..
फिर से ये नहीं मिलते…..
माना कि हो सुंदर तुम…! मगर ये दिन नहीं रहते….!!
” विश्व नन्द ”
( एक situation में प्रेमिका पर रचा हुआ एक नटखट गीत )
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’की’ की जगह ’कि’ होना चाहिये.
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