दिल पर है जो किसी का ये आज भी इख्तियार सा क्या है


दिल पर है जो किसी का ये आज भी इख्तियार सा क्या है

आ रही  अब सॉसे भी रुक रुक कर ये इन्तजार सा क्या है

कोशिशे भी तो यहॉ आखीर वक्त कि पाबंद हुआ करती है

है मर्ज़ ही जो लाइलाज तो मसिहा तु लाचार सा क्या है

किमत इश्क़ की मै जानु या के मजनू हि जाने  है शायद्

आज के दौर मे फैला ये इश्क़ का फिर बाजार सा क्या है

कातिलो से पुछ्ने नुस्खा रगे जान का चला हु आज मै

अजिज़ है मुझे भी जिन्दगी तो उन पर ऐतबार सा क्या है

एक सॉस का सवाल है ली तो जिन्दगी न ली तो मौत

मरना हिज्र मे आसान है तो ये मुझ पर दुश्वार सा क्या है

उतर आती है चिरती हुई वो शोख नज़रे दिल तक मेरे

छुपा उन शोख पलको मै तेज़ एक ये औजार सा क्या है

एक लम्हा जिने को कई सॉसे बेचा किया है मैने तुझ भी

जिन्दा रहने को अब खुदा तुझसे ये कारोबार सा क्या है

दिल कि रगे आज शाम से हि टुट रही है सिने मै कही

याद उनकी नही है तो दिल ये आज बेक़रार सा क्या है

भीगी सी पलके सुखे हुए लब और ये पलट के देख्नना

नही मुहोब्बत अगर तो ये तुफान के आसार सा क्या है

चलो माना के दुनियॉ ने ये बाते फैला रखी है इस तरह्

झूका है नाम पर सर उनके ये खामोश इक़रार सा क्या है

मेरी वफा को जुर्म साबीत किया कई सख्त आवाजो ने

आप रहे महफील मे यु खामोश ये इज़हार सा क्या है

मिला भी कोई हमसे तो यहॉ एक दिवार सा मिला है

फासले मिटा दिये सारे तो ये टुकडा दिवार सा क्या है

खास थे तुम उस शहर मै यहॉ अब आम हुए हो शकील

याद कर के उन गलियो को अब तु शर्मशार सा क्या है

 

 

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Comments

gazal ka bhav acha hai par meter me na hone se gaye na ja sakegi gazal aise lekhe jo har dhun pe gaye ja sake jaise
apne daman nahi ankhoo me chipa lo mujhko
ek ansoo hu bikharne se bacha lo mujhko
ab ise gun gunnakar dekho subh ashish
sada khush raho co-09827098925

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Kafiya aur Radeef milana hi sirf Ghazal nahi hai. Script clear honi chahiye. Meter bhi nibhana hota hai. Lyricist ki kabiliyat par shaq nahi.

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