जीवन में मेरे, सपनों की तरह…….!


जीवन में मेरे, सपनों की तरह…….!

जीवन  मे  मेरे,   सपनों  की  तरह,
दिन  आए  और  दिन  बीत  गये…..…
सपने  तो  मेरे  सपने  ही  रहे,
दिन  आए  और  दिन  बीत  गये..……..!

सोचा  था  कभी,   दिल  दूंगा  उन्हें,
मै  बदले  में  उनके  दिल  के
दिल  लेकर  वो  तो  चले  गए,
दिल  मुझको  देना  भूल  गए….
जीवन  मे  मेरे,   सपनों  की  तरह,
दिन  आए  और  दिन  बीत  गये…….…!

जिनको  चाहा  था  दोस्त  समझ,
उनकी  यारी  का  क्या  कहना,
जिन्हे  माना  था  मैने  अपना,
वो  जान  के  भी  अनजान  रहे…
जीवन  मे  मेरे,   सपनों  की  तरह,
दिन  आए  और  दिन  बीत  गये……….!

मेरा  जीवन  कुछ  विफल  रहा,
जो  माँगा  वो  तो  मिल  न  सका,
जो  मिला  उसे  ही  चाह  के  हम,
जीवन  सपनों  में  बिता  रहे…….
जीवन  मे  मेरे,   सपनों  की  तरह,
दिन  आए  और  दिन  बीत  गये…….… !

” विश्व नन्द “

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Comments

दिन आए और बीत गए……., सुंदर अभिव्यक्ति है.

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हमेशा की तरह…सरल और सुन्दर प्रवाह

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fluent poem………nice one :)

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Belated thanks to you all for your heart warming comments on my poem. These are very valuable to me.
Pleased to inform that I have posted a podcast of this poem, which you may also find interesting

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