पास मेरे तुम होते……!
पास मेरे तुम होते……!
पास मेरे तुम होते, दिन कितने मीठे होते,
यादों में भी तुझसे, हम कुछ और नहीं कहते,
“पास मेरे तुम होते,
दिन कितने मीठे होते.”
जब से देखा था तुझको, मान लिया दिल ने अपना,
देख मुझे मुसकाये तुम, लगा था सच होगा सपना,
ललचाया था दिल मेरा, तब भी तुझसे ये कहने,
“पास मेरे तुम होते,
दिन कितने मीठे होते.”
अब जो कभी मिलते हम तुम, शरमाते ही रहते हम,
दिल की धड़कन बढ़ जाती, बात न लब तक कुछ आती,
वक्त भी यूं ही गुजर जाता, मन ही मन तुझसे कहते,
“पास मेरे तुम होते,
दिन कितने मीठे होते.”
तेरी दुनिया में शायद, मेरी जगह है ना कोई,
मेरे सपनों की महफिल, तुझसे ही है सजी हुई,
दिन भी ये बीतें मेरे, गीत तेरे लिखते गाते,
“पास मेरे तुम होते,
दिन कितने मीठे होते.”
“विश्व नन्द”
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अपनी लयबध्दता और शब्दों के सुंदर प्रयोग गीत बेहतर बन पड़ा है. एक प्रेमिल रचना. आप और हर्षकान्त शर्माजी दोनों ही इस वय में भी……..कितने -कितने प्रेम से भरे हुए हैं.मैं इससे बहुत प्रभावित हूँ.
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