पानि आया पानि आया?


This is my first hindi poem, it may seem to be not in pure hindi…forgive me for that……please read it and send reviews……………….

पानी आया पानी आया, क्या पानी, पानी लाया
रंग में रंग हैं. या आसमा की छाया
प्यास से हैं जन रोया, प्यास से हैं मान रोया
पानी आजा, पानी आजा, इस साल मैंने सब जो हैं बोया.

रेगिस्तान में प्यास हैं, और दूर एक गाव मैं आस हैं
कोई भी रंग में तू आये, तेरे बीना साब उदास हैं.
में टुटा और मेरी दरथी टूटी, खेतो के लाश हैं
दोनों ही टूटे हैं, गाव हो या रेगिस्तान, तेरे ही लुटे हैं.

कही तू आया, और कही हैं तुने खून लाया,
प्यास कही भुजी, और कोई प्यासा ही सोया
खेत कही बंजर हुए, और खेत कही समंदर,
घर कहीं टूटे टूटे, और ये डूबा मंज़र.

मेरे गाव में ना कोई समंदर, मेरे गाव में ना कोई मंज़र,
अब साल हुआ, मेरे खेत कड़ी हैं बंजर
तेरे इंतज़ार में, कितनो ने हैं रांगेय खंजर,
अब शायद मेरी बारी हैं, तुने आना हैं आज,
मेरे बाद शायद कितने हैं, तेरी आस में मिटने हैं,

पानी आया पानी आजा, पानी आज तु आजा………………

 

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Comments

well, again i wouldd like to tell u that the flow is good and u tried to touch almost all d aspects of rain.good work.

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Vijesh, Thanks………..

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