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अशहार – दिल के कलम से

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Hindi Poetry

आशिक फरेबी होते हैं वो, जो मोहब्बत को बदनाम करते हैं
दिल को लुटाने वालों के,            कत्ल वो सरेआम करते हैं

इश्क का नाम जुबाँ पे आते ही, दिल में मलाल होता हैं
देखा हैं मोहब्बत के जूनून में,    दुनियां उजड़ते देखा हैं

आशिक – फरेबी इश्क कभी किया नही करते  
मोहब्बत के बहानें, सुदो – जयां देखा नहीं करते

शहीद हो गए कितने इस तपिशें – नातमाम में
गुम हो गए क़दमों के निशां इस इश्के खागदा में

दिल सोजे – गमहा -ऐ – निशानी, जला डाला तन-मन को
अब राख के ढेर में , चिंगारी ढुंढा करते हैं

नींद रात को मुझको कभी आती नहीं 
बंद आंखों से बुत नदीमें देखा करते हैं .
                                            स्वयं प्रभा मिश्रा
 

आशिक – फरेबी………………………………..प्रेमी को धोखा देना  
सुदो – जयां …………………………………….लाभ हानि
तपिशें – नातमाम………………………………अपूर्ण ज्वाला 
खागदा …………………………………………अँधेरी दुनियां
दिल सोजे – गमहा -ऐ – निशानी…………..निहित गम की गर्मी    
नदीमें……………………………………………मित्र      

One Comment

  1. spmisra says:

    Plz comment on this……….

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