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दिन आए, और दिन बीत गए……..!

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Hindi Poetry

दिन  आए,   और  दिन  बीत  गए……..!

जीवन  मे  मेरे,   सपनों  की  तरह,
दिन  आए  और  दिन  बीत  गये…..…
सपने  तो  मेरे  सपने  ही  रहे,
दिन  आए  और  दिन  बीत  गये..……..!

सोचा  था  कभी,   दिल  दूंगा  उन्हें,
मै  बदले  में  उनके  दिल  के
दिल  लेकर  वो  तो  चले  गए,
दिल  मुझको  देना  भूल  गए….
जीवन  मे  मेरे,   सपनों  की  तरह,
दिन  आए  और  दिन  बीत  गये…….…!

जिनको  चाहा  था  दोस्त  समझ,
उनकी  यारी  का  क्या  कहना,
जिन्हे  माना  था  मैने  अपना,
वो  जान  के  भी  अनजान  रहे…
जीवन  मे  मेरे,   सपनों  की  तरह,
दिन  आए  और  दिन  बीत  गये……….!

मेरा  जीवन  कुछ  विफल  रहा,
जो  माँगा  वो  तो  मिल  न  सका,
जो  मिला  उसे  ही  चाह  के  हम,
जीवन  सपनों  में  बिता  रहे…….
जीवन  मे  मेरे,   सपनों  की  तरह,
दिन  आए  और  दिन  बीत  गये…….… !

” विश्व नन्द “

3 Comments

  1. Aashish ameya says:

    yahi zindgi hai sir…good one

  2. neeraj guru says:

    आदरणीय, आपकी कवितायें आपके कवि-व्यक्तित्व का अनुभव तो कराती ही हैं,जिससे हम सभी, p4poetry के दीवाने तो परिचित ही हैं, पर पूना में आपसे मिलने का मेरा अनुभव शब्दों से परे है,मैं तो सभी p4poetry के सदस्यों सिर्फ यही कहूगां की आप सभी को एक बार विश्वनान्दजी से ज़रूर मिलना चाहिए.आपका व्यक्तित्व आपकी कविताओं की तरह ही रसमय-लयमय है.

  3. VishVnand says:

    I thank you for your kind comments of appreciation, which are very valuable encouragements to me and am pleased to inform that I have now posted a podcast to this poem and shall be happy if you do listen to it, when convenient.

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