पीनेवाले पीते हैं…!


पीनेवाले  पीते  हैं…!

लाख  मना  करने  पर  भी  क्यूँ,  पीनेवाले  पीते  हैं.
कहने  वाले  कहते  रहते,   पीनेवाले  पीते  हैं…….
सच  यारों,  हम  बिना  पिए  ही,  आज  गीत  ये  गाते  हैं…..
हर  महफ़िल  मे  पीकर  ही  क्यूँ,   खुशियाँ  हम  मनाते  हैं.
लाख  मना  करने  पर  भी  क्यूँ,  पीनेवाले  पीते  हैं…….

जीवन   की  उलझन  सुलझाने,  कोई  इतना  पीते  हैं,
हँसते  हँसते  पीकर  ये  भी  आख़िर  रोते  रहते  हैं.

कोई  पीते  याद  भुलाने,   कोई  यादों  की  खातिर,
कोई  मस्त  मजे  मे  पीकर,   करते  हैं  जेबें  खाली………
( पहले  पहले  दोस्तों  की,   फिर  ख़ुद  अपनी  )

कोई आते प्यास बुझाने,  पी जाते हैं बस इतना,
फिर भी प्यास नहीं बुझ पाती,  पीना है  झूठा  सपना…….

खुशी हुई,  ये तब भी पीते, गम हो, गम को भगाने पीते,
पीने का ना मिले बहाना, तो इस उलझन मे भी पीते,
पीने की आदत पड़ जाती, फिर तो ये बस पीते रहते.

इनको  क्या  समझाए  कोई,   ख़ुद  “जीवन”  है  एक  नशा,
जिसने  जब  ये  सच  है  जाना,   उसे  न  पीने  की  परवाह,

दुनियावालो………
असली  जीवन  का  रस  पीना….

असली  जीवन  का  रस  पीना,   दुनियावालो  तुम  सीखो,
हरदम  मस्त  मजे  मे  रहकर,   बिना  पिये  जीना  सीखो……….
बिना  पिये  जीना  सीखो…………….
बिना  पिये  जीना  सीखो….
                                                                        ” विश्व नन्द ”

                                              

( This was composed as a  party song)                 

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Comments

Wow . Wonderful poem with a social message बिना पिये जीना सीखो .

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वाह ….ख़ुद “जीवन” है एक नशा .

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Another thought on “Drinking” I remember..

पीने के बहाने कभि कम न थे
खुशियॉ कम न थि
घम कम न थे…

फूलों पे अब लहु के दाग हैं
कल कानटे भि इत्ने बेरेहेम न थे…

आज कल पैरोनं मे छाले पडे हैं
पेहले दर्द ऐसे हम्कदम न थे॑ …

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I Thank you all for your encouraging comments.
Raj ji, the piece you remembered is too good. For myself & others for easy read, I have retyped it correcting the font mistakes & it reads as follows.
पीने के बहाने कभी कम न थे,
खुशियाँ कम न थीं,
गम कम न थे
फूलों पे अब लहू के दाग हैं
कल कांटे भी इतने बेरहम न थे.
The lines are indeed fantastic. With these lines, I was inspired & led to add a stanza (5th) in my poem which probably now, gives the song a state of completion.
Thank you indeed very much.

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Sorry , I missed last two lines of the above..
आजकल पैरों में छाले पडे हैं,
पहले दर्द ऐसे हम कदम न थे… Kya Baat Hai

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