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बेचैनी और घबराहट ….!

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Hindi Poetry

बेकार  की  ये  बेचैनी  है,
बेकार  की  सब  घबराहट  है,
तुम  इससे  विचलित  मत होना,
सब  अपने  सोच  की  खामी  है,
रहता  इनमें  कुछ  तथ्य  नहीं,
मन  की  ही  ये  मनमानी  है,
मन  की  ही  ये  शैतानी  है……!

सोचो  ये  कौन  ठिकाना  है,
ये  जग  ही  मुसाफिरखाना  है,
यहाँ  कुछ  भी  न  हमको  पाना  है,
ना  कुछ  भी  हमरा  जाना  है,
प्रकृती  का खेल  समझने  को,
प्रकृती  के  नियम  निभाना  है…….!

इतना  सारा  सब  पास  जो  है,
हमे  और  की  काहे  जरूरत  है,
सब  सुख  है  इसमे,   पास  जो  है,
इतना  ही  ज्ञान  जरूरी  है..……….!

ख़ुद  के  ही  शांत  विचारों  से,
प्रकृती  के  दोष  समझना  है,
काम  क्रोध  और  मोह  को  तज,
हमे  अंहकार  से  बचना  है,
हर  साँस  प्रभू  के  नाम  को  स्मर,
सुख  मे  ये  जीवन  जगना  है……..!

ये  कामधाम  जो  सामने  हैं,
वो प्रभु के भेजे ही तो हैं,
तन्मय  हो,  प्रेम  से  इनको  कर,
( पूजा  ही  समझकर  इनको  कर )
प्रभू  को  ही  अर्पण  करना  है…….!

प्रभूप्रेम  मे  ओतप्रोत  हो,   यूं,
हमे  प्रेम  की  वर्षा  बनना  है,
बेकार  की  इस  बेचैनी  को,
बेकार  की  हर  घबराहट  को,
सत्ज्ञान  के  सुख  मे  बदलना  है….
बेचैनी  और  घबराहट  से,
बिलकुल  न  हमे  अब  डरना  है ………!

                                                    ”  विश्व नन्द ”

(बड़ी घबराहट और बेचैनी के  बीचोंबीच  ही यह कविता जन्मी थी,
जिसने मन को बहुत खुशी, शान्ति, सांत्वना और विचार की दिशा, प्रदान की थी.
आशा है आपको भी अच्छी लगे और ऐसी ही सुखद अनुभूति दे.) 

4 Comments

  1. renu rakheja says:

    वाकई मन को शान्त और खुश कर गयेी

  2. Neeraj Guru "Badal' says:

    yeh shabd hi hain jo hume zinda rakhe huye hain, tab jeevan ka har ullas,har khushi,har dukh,har peeda aise hi shabdon me vyakt hote rahege.

  3. Vikash says:

    सुंदर एवं प्रेरक 🙂

  4. medhini says:

    A good poem with good advice
    to give up kam, krodh, mohh
    and ahamkar and to do work
    by placing everything and
    self itself in god.Isn’t it
    Geetha’s essence too?
    Thank you,sir.

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