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स्वप्न

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Hindi Poetry

सावन के महीने में
ठंडी हवाओं में
झरती फुआरों में
भीगे से तन-मन में
सूने से चितवन में
गदराए मौसम में
प्रिये याद आती है |

मन अधूरा तन अधूरा
में अधूरा स्वप्न पूरा |

चाँद से चेहरे पर ,
घूंघट है छोटा सा
आलिंगन प्रियेतम का
घेरा है बाहों का
होठों पे चुम्बन
बस …
ख़ुद अपने आप को
पिया भूल जता है
स्वप्न टूट जाता है ||

-विमल शर्मा

One Comment

  1. Renu Sharma says:

    बहुत अच्छी श्रृंगारिक कविता है |
    प्यार और प्रकृति का बहुत सुंदर चित्रण है |
    very good !! 🙂

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