« »

सिफर

1 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 51 vote, average: 3.00 out of 5
Loading...
Hindi Poetry

चाहे जितना
छापे मार लो ,,
चाहे जितना
छाप लो
हमारी छाप को ,
चाहो तो ,
ढूढ लो ,हमारी
महालक्ष्मी का
कण-कण ,
जो बिखरा दी है ,
हमने
” मिस्र के पिरामिड मै
दबी -छुपी
कब्र के संरछ्न मै
चिरंतन सोई
माया सी ”
चाहो तो ,
खोज लो
रिश्तों -नातों
से लिपटी
हमारी ”माया ” मेम को
जो ,सूतक के
दोष सी ,
उनमें समाहित है |
चाहो तो
शोध कर लो
हमारी ,
महामाया मंडली पर ,
सार के रूप मै ,
सिर्फ़ ,
सिफर पाओगे ||

-रेणू शर्मा

Leave a Reply