ग़ज़ल
जब हदों से गुजर गए आंसू,
कितनी यादों को जगा गए आंसू .
कोई आएगा किसी दिन कहीं से,
कहकर कितना तड़पा गए आंसू .
कभी था नहीं जब कोई आस-पास,
तब भी सराबोर करा गए आंसू .
कितने दर्द थें यहाँ आने को बेताब,
आते-आते उन्हें छुपा गए आंसू .
आएगा कोई कहा था जब दिल ने,
उसके इन्तजार में रुला गए आंसू .
किसी सुबह के इन्तजार में ,
रात भर जगा गए आंसू .
छोटा-सा था अफ़साना मगर,
आसमां तक फैला गए आंसू .
प्यार करेगा कोई बादल से,
आंखों को थका गए आंसू .
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-नीरज गुरु “बादल’
भोपाल.

कितने दर्द थें यहाँ आने को बेताब,
आते-आते उन्हें छुपा गए आंसू .
भई वाह !!
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