तुम अनजान हो

(उन लड़कियों को जो हमारी बहनें हैं, कल की आशाएं हैं, देश की भविष्य हैं, बचाने की छोटी सी मेरी एक कोशिश)

कितनी नादाँ हो - ऐ लड़की तुम कितनी भोली हो
दुनिया की रीत से तुम बिल्कुल अनजान हो
मचलती हो - मटकती हो अभी तुम बच्ची हो
धूल में खिली फूल की तुम एक कली हो
प्यार के इस दौड़ में तुम बिल्कुल अनजान हो
        नज़र ना मिलाना किसी ऐसे मनचले से
        दिल ना देना किसी ऐसे दीवाने को
        जिसकी नज़र हमेशा तेरे रूप पर होती है
        जिसकी चाहत सिर्फ़ तुझे लूटने की होती है
        सोच समझ कर चलना ये ज़माना ख़राब है
        हर ओर, हर जगह सिर्फ़ बर्बादी का शबाब है
उस राह से ना गुजरना जहाँ अँधेरा ही अँधेरा हो
उस जगह से ना गुजरना जहाँ मनचलों का डेरा हो
भगवान् ना करे तुझपर किसी दरिंदे का साया हो
साथ अपने ले लेना जिसपर तेरा भरोसा हो
चाल ऐसे चलना कि दरिन्दें भी करें तुझे सलाम
पर ज़रा ध्यान से - ज़माने की चाल से तुम अनजान हो
कामिल मिंज “वायलेट”

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A good attempt on an important advice.

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