अरमान

न पीता हूँ न पीना चाहता हूँ
अभी कुछ दिनों और जीना चाहता हूँ
अपनी पुरानी जिंदगी बदलना चाहता हूँ
इक नयी जिंदगी बसाना चाहता हूँ

पिलाकर मुझे, मेरी उम्र कम ना करो
पीता नहीं हूँ इसलिए कोई गम ना करो
ऐ दुनियावालो! मेरा रास्ता जाम ना करो
फिर पिलाकर मुझे बदनाम ना करो

दुनिया की खींचातानी से दूर रहना चाहता हूँ
बीती दुखों को दिल से निकालना चाहता हूँ
दुःख की इस चारदीवारी से निकलना चाहता हूँ
प्यार की प्रीत जोड़ना चाहता हूँ

मेरी इस तम्मन्ना को मटियामेट ना करो
पर कोई तो मेरी सहायता करो
मेरे अरमानों पर हँसी ना करो
ऐ दुनियावालों! मुझसे नज़र ना फेरो

मैं भी इक इंसां हूँ, कोई देवता नहीं
सिर्फ अरमां लिए ही फिरता हूँ
लाख कोशिशों के बावजूद भी
दुनिया की ताकत से लड़ नहीं पाता हूँ

ना समझो मुझे कोई पागल
ना समझो इसे कोई ग़ज़ल
मेरे इन अरमानों पर तुम
दुनियावालों ना देना कोई दखल
कामिल मिंज “वायलेट”

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