सुनो नन्ही लड़की…,
[ बहुत साल पहले एक छोटी-सी लड़की ने मुझसे पूछा था कि - जब मैं बड़ी हो जाउगी तब क्या होगा ? तब मैंने यह कविता लिखी थी, यह बात १९८८ की है, आज वह लड़की बड़ी हो चुकी है, पर अभी हाल में ही नोएडा के आरुषी हत्याकांड ने मुझे उन दिनों के प्रश्नों और उन प्रश्नों के उत्तर में लिखी गयी कविता की याद ताज़ा करा दी....आप सभी से अनुरोध है कि आप सभी यह कविता पढ़े और बताएं कि मैं कितना सच हूँ......! ]
सुनो नन्ही लड़की,
जब तुम बड़ी हो जायोगी,
तब समझोगी-
इन आंखों कि भाषा,
इन आंखों के भावार्थ ,
सुनो नन्ही लड़की-
जब तुम बड़ी हो जायोगी,
एक दिन जब तुम अचानक,
विमूढ़ - विस्मय से रह जायोगी हतप्रभ,
लगे जब दर्पण का कोई कोण सुंदर,
और हो यह अंतर्द्वंद कि - है कौन सुंदर,
तब सुनोगी अपनी बढती उम्र कि पदचाप,
सुनो नन्ही लड़की,
जब तुम बड़ी हो जायोगी,
यायावर यह उम्र,
रुकेगी नहीं जब नाचती राधिका,
झंकृत हो उठेंगें जब शांत पड़े नुपुर भी,
तब खुलेगें तुम्हारे लिए रहस्य कई,
जैसे चिड़ियों का चहकते हुए फुदकना,
सुनो नन्ही लड़की,
जब तुम बड़ी हो जायोगी,
दिन या रात किसी भी समय,
आए हुए किसी स्वप्निल क्षण में,
ऐयारों के रच-गढे तिलिस्म में तुम,
और ऐयारों के हाथों में -
खेलती - इठलाती तुम्हारी यह वय,
होना चाहोगी गुम तुम यहीं - कहीं,
सुनो नन्ही लड़की,
जब तुम बड़ी हो जायोगी,
हैं नहीं यहाँ पथ आसान,
कटुता - लोलुपता - विषाद के मोड़ों पर,
और कंटकीर्ण पथ के किनारों पर,
नरभक्षी वृक्षों के झुरमुट,
विषैले आतुर उनके बाहुपाश,
रहेगें लालायित लपकने को तुम्हे हमेशा,
सुनो नन्ही लड़की,
जब तुम बड़ी हो जायोगी,
प्यार कि यहाँ कई परिभाषाएं प्रचलित हैं,
अतः किसी के आलिंगन में तुम,
क्या पता उन शरीरों कि गंध -
पहचान पायोगी या नहीं,
चट्खे हुए रंगों भरे फूलों का जब हो मोह तुम्हे,
तोड़कर किसी एक फूल को -
तब झांकना मेरी आंखों में,
उस दिन समझोगी तुम आंखों के भावार्थ - आंखों कि भाषा,
सुनो नन्ही लड़की -
एक दिन.
जब तुम बड़ी हो जायोगी.
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- नीरज गुरु ” बादल’
भोपाल.
Comments
Editing से मेरा मतलब था कि कविता में जो देवनागरी लिपि के ग़लत शब्द छपे हैं जैसे “जायोगी”, “यायावर”, ” “पायोगी” etc उनको correct करना, ना कि मूल कविता को सुधारना.
वरना आपकी ये कविता तो बहुत सुंदर है. गलतफहमी के लिए क्षमस्व.

उस मार्मिक और सुंदर क्षण की, जब आप ने ये कविता महसूस की और लिखी होगी, पड़कर हम भी बहुत अच्छी तरह सुन्दरता से महसूस कर रहें है. अगर आप इस कविता को जरा ध्यान से फिर एडिट करें तो बिन प्रयास पढ़ने में और ज्यादा मजा आएगा. अच्छी कविता के लिए धन्यवाद…
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