भाई प्रेम सिंह
भाई प्रेम सिंह
(बांदा के एक प्रयोगधमीॆ किसान, जो खेती को उत्पादन का माध्यम मात्र नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ जीने का एक अभ्यास बताते हैं )
उसने मिट्टी को छुआ भर था,
धरती ने उसे सीने से लगा लिया
उसने पौधे लगाए
खुश्बू उसकी बातों से आने लगी
पेड़ समझने लगे उसकी भाषा
फल खुद-ब-खुद उसके पास आने लगे
पक्षी और पशु तो
सगे-सहोदर से बढ़कर हो गए
जो मुश्किल भांपते ही नहीं
उन्हें दूर करने की राह भी बनाते
मैने पूछा भाई प्रेम सिंह
क्या कुछ खास हो रहा है इन दिनों
खिलखिला पड़े वो
कहने लगे
लोग जिस स्वगॆ की तलाश में हैं
मैं वही बनाने में जुटा हूं
-प्रताप सोमवंशी

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bhai prem singh has understood the essence of our life….
thanks for sharing
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