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रिश्तों के कुछ दोहे

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Hindi Poetry

रिश्तों के कुछ दोहे

प्रताप सोमवंशी

डूब मरूंगी देखना ताल-तलैया खोज।
भइया शादी के लिए तुम रोए जिस रोज।।

अम्मा रोये रात भर बीवी छोड़े काम।
मुंह ढांपे जागा करें दद्दा दाताराम।।

चाचा तुम करने लगे रिश्तों का व्यापार।
आए जब से दिन बुरे आए न एको बार।।

 

छोटे तुम चिढ़ जाओगे कह दूंगा बेइमान।
आते हो ससुराल तक हम हैं क्या अनजान।।

भाभी बेमतलब रहे हम सबसे नाराज।
उसको हर पल ये लगे मांग न लें कुछ आज।।

पूरा दिन चुक जाए है छोटे-छोटे काम।
कब लिख्खे छोटी बहू खत बप्पा के नाम।।

5 Comments

  1. preeti datar says:

    Bahut hi real account….
    Keep Writing!

  2. Aashish ameya says:

    last one is the best

  3. dr.poonamparinita says:

    en risto mey mai khiada raha khud hi ko khoj
    dukhi ek shayad mai hi hu baki to sab ki mouj

  4. prem puneet says:

    सहज और आडम्बरहीन कथ्य और भाषा की मार्मिक रचना ।

  5. rajendra sharma vivek says:

    very good dohe about relationship .congraulation this effort

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