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“मेरी आवाज़ मै वो धून नहीं है…”

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Hindi Poetry

मेरी आवाज़ मै वो धून नहीं है,

तू नहीं है तो सुकून नहीं है! (१)

खो गई हो तुम इन बहारों मै,

हम को तो ये भी मालूम नहीं है!(२)

तुने तन्हा किया मेरे दिल को,

बेकरारी अब बढ़ती जा रही है!(३)

लौट कर आ जाओ मेरे दिल मै,

सपना बनकर हमे ना तड़पाओ तुम!(४)

साथ जीने की तमन्ना है दिल मै,

बसालो हम को भाई अपने दिल मै!(५)

– अमित शाह (M.A.S.)
24th January, 2007

2 Comments

  1. Renu Sharma says:

    achchi kavita hai.intjar ki had ho gai hai.bahut sundar shabdon main banda hai.

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