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“मत पडो इश्क की उलज़न मै…”

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Hindi Poetry

महबूबा को समजाने के लिए,
उनसे इश्क करना पड़ता है;
इश्क करने के लिए,
इस दिल को समजाना पड़ता है;(१)

यह इश्क भी अजीब चीज़ है, मेरे दोस्त…
जिसमे मंजील तो होती है, मगर…
उन तक पहुंचने का रास्ता ढूंढ़ना पड़ता है;(२)

इसीलिए हम कहते है…,
मत पडो इस इश्क की उलज़न मै,
क्योंकी… इसे सुलजाने के लिए,
खुदको उलज़ाना पड़ता है;(३)

अगर ना सुलज़ा पाए तो भगवान् भी कुछ नहीं कर सकता;
आखिर में दिलवालो को भी अपना दिल खोना पड़ता है;(४)

-अमित शाह (M.A.S.)
8th January, 2007.

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