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अहसास

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वक्त थम जाता है
जब आगोश में
प्रिये हो किसीके ,
वक्त रुक जाता है
जब आगोश हो
खाली प्रिये का
नयन में सांझ बसती
और अधरों पर सवेरा
जब प्रिये आगोश में हो
सांझ बस जाती नयन में
और अधरों पर सवेरा
जब प्रिये की याद दिल में
जब प्रिये हो पास दिल के
धडकनों का मूल्य क्या है
धड़कने निर्मूल्य हैं जब
आगोश खाली प्रिये का
सामने बैठी रहो तुम
हर समय
मधुमास मेरा
हर समय उपहास मेरा
जब प्रिये तुम दूर मुझसे
 
विमल शर्मा

 

5 Comments

  1. sushil sarna says:

    a depth of love is in your poem.Continue to convert your feelings into words.

  2. vijesh bhute says:

    well written.

  3. amit478 says:

    nice.. Good one.

  4. Renu Sharma says:

    achchhi yaden hain.good poem.

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