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Hindi Poetry
हरी चादर के नीचे ,
हम अगरबत्ती जला रहे हैं ,
लंबे लंबे गुम्बदों के नीचे ,
दीवार पर लटके आदमकद में ,
उसे देख रहे हैं ,
दूर रेलवे लाइन के किनारे ,
दाडीवाला बाबा !
मोरपंख हिलाकर ,
उसे !! पाने का रास्ता ,
बता रहा है ,
जाने कितने मोड़ ,
गलियों और चोंराहों पर उसका पता लिखा है ,
पर ,
हम जानते हैं कि ,
वह हमारे पास है ,
हमारी आत्मा में है ,
हमारे विचारों में है ,
हमारे कर्मों में है ,
फिर भी ,
भटक रहे हैं ,
यहाँवहाँ उसकी खोज में

रेणू शर्मा

4 Comments

  1. Md Khalid says:

    Ye aapne bilkul sahi kaha ki wo hamare pass hain phir bhi hum use khoj rahe hai , I like ur poem and waiting for another one …..best of luck

  2. renu rakheja says:

    We share the same name and thoughts too….
    Have written a poem in the same lines….would like you to read it and welcome to p4poetry !!
    http://poemhunter.com/members/mpoems/default.asp?show=poem&poem=6470661

  3. Sachin Savner says:

    yu hi bhatkte raho……

  4. Sachin says:

    Very nice lines Keep it continue

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