तुम्हारे लिये (१-५)

जीवन अगर कभी जन्म ले सकता

तो वो दिखता

बिल्कुल तुम सा!

मेरी बेचैनी को ढालकर

पी जो जाती हो अक्सर -

क्या सचमुच नशा नहीं होता.

तुम्हारी हँसी इतनी कठोर क्यों है?

तुरंत तोड़ देती है

मेरी उदासी का दर्पण!


तुम अजीब हो!

तुम्हारे साथ आसमान गहरा लगता है

और समंदर ऊँचा.

मेरी कल्पना कितनी भी ऊँची उड़े

तुम्हारे अस्तित्व को आकार नहीं दे पाएगी.

कविता ’पागल’ हो जायेगी.

Comments

अगर मेरे लिये लिखी होती तो शायद पागल हो जाती

I can’t even begin to choose which one of these do I like more…this is classic work yatharth!

Keep Writing!

Welcome to P4poetry !
Every one of them is a jewel

सुंदर, अति सुंदर :)

कविता के लिये:
“पागलपन की बात नहीं है, बात है ये कुछ भावों की
प्रेमगीत तुम समझे बैठी, पगली! ये कथा अभावों की!”

प्रीती, रेणु, विकास को भी आभार!!!

Whoa! How do you write so well?! Ya, call me ‘pagli’ if you want to…but I was just trying to convery my thoughts, cause the day someone would write someone so beautiful for me, I’d actually go ‘mad’!

कल्पना का कोई रूप, रंग, आकार नहीं होता.
तुम यही समझ लो, ये तुम हो. :)

मेरे अगले किस्त की अंतिम पंक्ति तुम्हें समर्पित.

Really?! Thanks for the dedication!

Umda !

awesome… liked the following ones the most

मेरी बेचैनी को ढालकर

पी जो जाती हो अक्सर -

क्या सचमुच नशा नहीं होता.

तुम्हारी हँसी इतनी कठोर क्यों है?

तुरंत तोड़ देती है

मेरी उदासी का दर्पण!”

hi

“kavita pagal ho jayegi”

hume toh bezubaan kar gayi…

वर्तिका जी, रूपेश जी एवं प्रियल जी!
प्रोत्साहन का शुक्रिया.

very beautiful poem………..

thats amazing

मेरी कल्पना कितनी भी ऊँची उड़े

तुम्हारे अस्तित्व को आकार नहीं दे पाएगी.

कविता ’पागल’ हो जायेगी.

bahut umda………….

too good………….

बहुत अच्छे भाव हैं, कुछ हट के ! मुझे बहुत आनंद आया !
शुक्रिया !

वाह बहोत खुब….

कल्प्ना अत्यन्त खुबुसोरत पर कुच अधुरि है कुच अधिक पन्क्तियना शसक्त कर देते इसको

damdaar. hila ke rakh diya ander tak.

Bahut hi khubsurat kavita…..
keep writing Yatharth…………

lajawab hai hai tumhara pagal pan

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